Monday, July 30, 2012

दिशा भटकता आन्दोलन

जन लोकपाल लाने के लिए अन्ना जी का आन्दोलन सरकार के खिलाफ फिर से जारी है लेकिन कही न कही कुछ कमी सी है 
पिछले दिनों इस आन्दोलन के बारे में बहुत कुछ नकारात्मक मीडिया में छाया रहा और यह कहा जाने लगा की यह आन्दोलन फ्लॉप शो साबित हो रहा है जिस का एक कारण यह भी कहा गया की इस आन्दोलन को मीडिया उतनी तवज्जो नहीं दे रहा जितना पिछली बार दिया था जब अन्ना इसी मुद्दे को लेकर अनशन पर बैठे थे 
तब लोगो में जो जोश और उत्साह था वह इस आन्दोलन में दिखाई नहीं दे रहा तब बच्चा बच्चा अन्ना के समर्थन में था लेकिन पिछले कुछ समय में ऐसा क्या हुआ की स्थिति एक दम से बदल गयी हालाकि आन्दोलन के शुरू होने के चार दिन बाद जब अन्ना स्वयं अनशन पर बैठे तब सूना पड़ा आन्दोलन स्थल पे काफी हलचल दिखी लेकिन यह उस भीड़ के आगे कुछ भी नहीं थी जो पिछली बार रामलीला मैदान पर जुटी थी 
काफी लोग इसका दोष मीडिया की सर दे रहे है की मीडिया अन्ना के आन्दोलन की कवरेज केंद्र सरकार के दबाव में नहीं कर रहा जो कुछ हद तक सही हो सकता है लेकिन इसका  तो सीधा सा यह मतलब हुआ की आपका आन्दोलन मीडिया की ताकत के बिना कुछ भी नहीं और पुराना आन्दोलन तो मीडिया द्वारा पानी पर निर्मित एक बुलबुला था जो समय पाकर फूट गया 

इसका अर्थ यह भी हुआ की आपका पुराना आन्दोलन लोगो के दिलो दिमाग पर पूरी तरह से असर कर पाने में नाकाम हुआ अगर ऐसा न हुआ होता तो आज यह स्थिति न हुई होती 

आज दैनिक भास्कर में टोनी जोसेफ द्वारा अभिव्यक्ति के अंतर्गत लिखे लेख की चंद पंक्तियों का जिक्र करना चाहूँगा  "सोचिए किसी दिन आप काम से वापस लौटते हैं और अपने अपार्टमेंट को आग की लपटों से घिरा पाते हैं। आपके आस-पड़ोस वाले आग बुझाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। कोई बाल्टी से पानी उड़ेल रहा है, कोई हॉजपाइप के सहारे आग पर पानी फेंक रहा है तो कोई लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाने में लगा है। ऐसे में आप क्या करेंगे? उनके साथ आग बुझाने की कोशिशों में जुट जाएंगे या फिर हाथ पर हाथ धरे उनके नाकाफी साबित होते प्रयासों पर टीका-टिप्पणी करने लगेंगे? |"

मैं टोनी जी उक्त पंक्तियों से पूर्ण रूप से सहमत हू लेकिन जब यह आन्दोलन अपनी दिशा से ही भटकता हुआ दिख रहा है तो इसे पहले जैसा समर्थन ना मिलना वाजिब है क्या है वह वजह और क्या है वह मुद्दे जिसकी वजह से लोग इस आन्दोलन से पहले जैसा जुड़ाव महसूस नहीं कर रहे 

निश्चय ही अन्ना की कोशिशे काबिले तारीफ है लेकिन अन्ना टीम द्वारा दिए जा रहे अलग अलग ब्यान बाजी से उनके आपसी मतभेद और राजनितिक महत्वाकांक्ष सामने आ रही है 

सब से पहले तो अन्ना यह कहते है की हमारी मांग है की जन लोकपाल बिल पास करो नहीं तो गद्दी छोडो, अगर यह सरकार हट जाती है तो फिर नयी सरकार कौन बनाएगा जाहिर है विपक्षी दलों में से ही सरकार बनेगी और अन्ना जब उन विपक्षी दलों  समर्थन भी नहीं करते तो फिर देश कौन और कैसे चलाएगा और कहते है  की हमारी कोई राजनीतिक मह्ताव्कंषा नहीं है तो फिर भाई देश कौन और कैसे चलाएगा देश चलाने के लिए एक पूर्णकालिक सरकार की आवश्यकता है जो की आप पूरी होने नहीं देना चाहते  और अभी इस आन्दोलन में वह अपनी इस बात से पलटी मार गए और कहते है की हम एक पार्टी बनायेगे जो आने वाले लोकसभा चुनाव में सरकार के सामने खड़े होंगे 

अन्ना ने पिछले आन्दोलन के दौरान कहा की देश में जहा जहा भी चुनाव होंगे वहा हम लोग जायेगे और सरकार द्वारा समर्थित उमीदवारो को  वोट न देने की अपील करेंगे तो इस बात पर भी टीम अन्ना अडिग नहीं रही सिर्फ हरयाणा में हुए विधान सभा उपचुनाव को छोड़ दे तो उन्होंने अपना यह वादा भी नहीं निभाया 
 पिछला आन्दोलन जब शुरू हुआ था तो बाबा रामदेव और अन्ना ने एक साथ मंच साँझा किया था लेकिन दोनों में वैचारिक मतभेद होने से और अलग अलग आन्दोलन चलाने से भी इस आन्दोलन को नुक्सान ही हुआ है 

क्या सिर्फ जन लोकपाल तक ही है अन्ना का अनोद्लन ? देश के सामने और भी कई जवलंत मुद्दे है जिनका अन्ना जिक्र तक नहीं करते ? क्यों नहीं अन्ना आरक्षण के खिलाफ कुछ बोलते जिसने हमारे देश को जड़ तक खोखला किया हुआ ? आरक्षण के खिलाफ न बोलना एक प्रकार से आरक्षण का समर्थन करने जैसा ही है और सब जानते है देश में फैले हुए भ्रष्टाचार की एक महत्वपूर्ण वजह आरक्षण भी है लेकिन इस विषय में ना तो अन्ना तो न ही रामदेव कुछ बोलने को तैयार है बस दोनों अपनी डफली अपना राग गा रहे है 

सरकार भी इसे देख रही है और समझ रही है की आन्दोलन में श्रेय लेने की होड में फूट पड़ गयी है और अब यह पहले जैसा जन समर्थन इसी वजह से नहीं पा रहा है

कल अन्ना के समर्थकों ने प्रधानमंत्री के घर के सामने प्रदर्शन किया और अंदर पत्थर और कोयले भी फेके जो की पूर्णता गलत है एक तरफ तो अन्ना गाँधीवादी होने का दंभ भरते है और दूसरी तरफ हिंसक तरीके से उनके  समर्थक प्रदर्शन करते है

उपरोक्त बातों के कारण ही आन्दोलन अपनी दिशा से भटकता हुआ नजर आ रहा है और आम जनता इसमें पहले जैसा जुड़ाव महसूस नहीं कर पा रही है 

अगर अन्ना को लगता है की जन समर्थन उनके पक्ष में है तो उन्हें आने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी बना कर जरुर सरकार के समक्ष खड़ा होना चाहिए और अपनी मनमर्जी की सरकार बना कर अपने आन्दोलन के उद्देश्य को पूरा करना चाहिए 

Friday, July 20, 2012

वक्त कितना बीत गया पर बदला कितना कम


वक्त कितना बीत गया पर बदला कितना कम 
राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में एक बड़ा रोचक किस्सा प्रचलित है। बात उस समय की है जब कुछ स्कूल ऐसे होते थे, जहां सिर्फ राजा-महाराजाओं के बच्चे ही पढ़ सकतेे थे। एक राजा साहब ऐसे थे जिनके बेटे के साथ एक गरीब के बेटे को भी स्कूल भेजा जाता था। इस बात की क्षेत्र में बड़ी चर्चा थी। गरीब इस बात पर बल्ले-बल्ले कि उसका बेटा राजा के बेटे के साथ पढऩे जाता है। कुछ दिन बाद लोगों को पता चला कि गरीब का बेटा राजा के बेटे के साथ स्कूल तो जाता है, पर क्लास में नहीं बैठता। बाहर बैठा रहता है। अब लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई। सब सोचते यह क्या चक्कर है। कुछ लोगों का मन नहीं माना। किसी तरह से मास्टरजी तक पहुंच बनाई गई। पूछा। मास्टरजी ने कहा - हां, वह आता तो है। राजाजी ने यह कहलवाकर उसे भिजवाया था कि राजकुमार रानीजी के बहुत दुलारे हैं। आप ठहरे मास्टर, राजकुमार ठहरे बच्चे। हो सकता है राजकुमार कुछ गलती कर बैठें या कोई सबक ठीक से न सीख सकें। आपको गुस्सा आ सकता है। तो आप अपना गुस्सा इस गरीब बच्चे पर उतार लें। डांट लें, डंडा मार लें, चपत लगा लें। जब पूरा गुस्सा उतर जाए तो राजकुमार को प्यार से फिर सबक पढ़ा दें।

राजे-रजवाड़े नहीं रहे। किस्सा पुराना पड़ गया है, लेकिन किस्से की जो मूल सोच है, वह आज भी कहीं मौजूद है। कई बार खुले तौर पर देखने को भी मिलती है। राजनीति में ही देख लीजिए। कांग्रेस में कौआ भी कहीं गलती से कमाल दिखा दे तो क्रेडिट युवराज राहुल को ही जाता है। दलित के घर वे खाना खा लें तो जय-जयकार। पीडि़त की पीड़ा सुन भर लें तो वाह-वाह। मीडिया के सवाल का सही-सटीक जवाब दे दें तो विजन, इनोवेटिव सोच सब नजर आ जाए। लेकिन जब पूरी ताकत झोंकने के बाद भी उत्तरप्रदेश में राहुल का करिश्मा नहीं चल पाता तो पार्टी मौन धारण कर लेती है। हर कोई वह माथा तलाशने में जुट जाता है, जिस पर हार का ठीकरा फोड़ा जा सके। कभी-कभी सलमान खुर्शीद जैसे नेता भूल से सच बोल जाते हैं, मगर हल्ला इतना मचता है कि उन्हें भी जबान पीछे खींच लेनी पड़ती है। याद कीजिए, खुर्शीद ने सिर्फ इतना ही तो कहा था कि छोटी-छोटी उपलब्धियों से बात नहीं बनेगी, राहुल को बड़े फलक पर काम करना होगा। राजकुमार के बारे में यह राय भी कबूल नहीं है पार्टी को।

समाज में भी ऐसे अनेक उदाहरण मिल जाएंगे। समर्थ को सब माफ, बाकी को सब पाप। अभी पिछले दिनों की बात है। कोर्ट ने कहा - शहर में गुंडागर्दी बहुत बढ़ गई है, पुलिस कुछ कर नहीं रही। पुलिस को गुस्सा आया। गुंडे तो पकड़ में आए नहीं, तो वह ऑफिस जाने-आने वाले उन दोपहिया वाहन चालकों के चालान बनाने में जुट गई, जिनके वाहन में मड गार्ड नहीं हैं या जिनके साइलेंसर से अधिक धुआं निकल रहा है। पिछली दफा जब कोर्ट नाराज हुआ था खराब रोड और बिगड़े ट्रैफिक पर, तो प्रशासन ने हेलमेट अनिवार्य करने का बीड़ा उठा लिया था। है ना गजब?

एक और दृश्य देखिए - शहर में एक शॉपिंग मॉल के सामने कुछ अफसरों की गाडिय़ां नियमों को धता बताते हुए सड़क पर खड़ी थीं। गाडिय़ां तो अमूमन रोज ही खड़ी रहती हैं, पर उस दिन हल्ला इसलिए मच गया कि यह सब अखबार की सुर्खियों में आ गया था। सवाल उठने लगे। नियमों का पालन कराने वाले ही नियमों को कैसे तोड़ रहे हैं? ऊपर वालों ने नीचे वालों को डांटा, नीचे वाले और नीचे वालों पर भड़के। अंतत: जिन अफसरों की गाडिय़ां वहां खड़ी पाई गई थीं, उन्होंने अपने-अपने ड्राइवर को नोटिस थमा दिए - बताओ गाड़ी गलत पार्किंग में क्यों खड़ी की थी? गोयाकि साहब को तो कुछ पता ही नहीं। अब आप ही बताइए, क्या इन ड्राइवरों में आपको क्लास के बाहर बैठे उस गरीब बच्चे की सूरत नजर नहीं आती। बेशक वक्त काफी बीत गया है, पर शायद उतना बदला नहीं

भास्कर ब्लॉग में अनिल कर्मा जी द्वारा लिखे गए ब्लॉग के सोजन्य से 

Tuesday, June 12, 2012

खरी खरी


अमरीका की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने कल वह बात कही जी जानती तो पूरी कांग्रेस है लेकिन कोई भी इस बारे में बोलने को तैयार नहीं था . कल स्टेंडर्ड एंड पुअर्स S&P ने कहा की आने वाले समय में भारत की क्रेडिट रेटिंग और गिराई जा सकती है क्योकि भारत सरकार के कहने को प्रधानमंत्री तो श्री मनमोहन सिंह है लेकिन सत्ता की ताकत उनके हाथ में न होकर श्रीमती सोनिया गाँधी के हाथ में है 
भारत सरकार वैश्विक उदारीकरण की नीतियों का पालन अपनी सत्ता की मजबूरियों के चलते नहीं कर पा रही और सरकार की निति निर्धारण में सहयोगी दलों का अत्यधिक दबाव है जिस कारण कई बार सही फैसले भी राजनितिक वोट बैंक के डर से नहीं लिए जा पा रहे है 

S&P ने कहा की मनमोहन सिंह जब नरसिम्हा राव सरकार में वित् मंत्री थे तब उनका पर्दर्शन बेहतर था लेकिन अब जब प्रधान मंत्री है और उनसे बेहतर भविष्य की उम्मीद थी तो हर मोर्चे पर उनकी सरकार विफल है 
कांग्रेस की भी इस विषय में बोलती बंद है और उसके सब गला फाडू प्रवक्ता इस मुद्दे पर चुप है 
हो भी क्यों न हाई कमान ने इस विषय में मुह खोलने से जो मना कर दिया होगा वरना
दिग्विजय सिंह को शायद इसमें भी आर एस एस का हाथ लगता
बडबोले मनीष तिवारी को को इसमें विपक्षी पार्टियों की साजिश की बू आती होगी 

लेकिन कुछ भी हो अब तो इस सच पर विदेशी ठप्पा भी लग गया 
अब तो कांग्रेस को अपनी गलत नीतियों में कुछ सुधार करना चाहिए वरना 2014 चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है 

Wednesday, March 14, 2012

रेल बजट का विश्लेषण

आज माननीय रेल मंत्री श्री दिनेश त्रिवेदी द्वारा संसद में रेल बजट प्रस्तुत किया गया
जैसे की होता आया है हर वर्ष की तरह घोषणा ही घोषणा और यह रेल मंत्री भी घोषणावीर बन गए
लेकिन जिस एक बात ने हम रेल फेंस का दिल जीत लिया वह यह की इस बजट में त्रिवेदी जी ने यह दर्शा दिया की वह आंखे बंद कर के तृणमूल कांग्रेस की अपनी नेत्री सुश्री ममता बनर्जी के पिछलग्गू नहीं बने रहना चाहते
उन्होंने राजनीती से ऊपर उठ कर वह किया जो पिछले कई वर्षों से कोई रेल मंत्री करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था
जी हा मैं बात कर रहा हू रेल किराए में बढोतरी की
आठ वर्षों के बाद रेल किराए में मामूली बढोतरी की गयी जिसे लेके बहुत हो हल्ला हुआ और गन्दी राजनीती शुरू हो गयी
सुश्री ममता जी ने फिर से अपना राग अलापना शुरू कर दिया की किराये में वृदि हर कीमत पर वापिस लेनी होगी और इस बयान में उनका घमंड साफ़ झलकता है की वह अपने किसी मातहत को बिना अपनी मर्जी के कुछ नहीं करने देगी
गौरतलब है की भारतीय रेल की यात्रा पुरे विश्व में सब से सस्ती यात्रा है लेकिन जैसा की हम जानते है रेलवे की स्थिति इस वक्त बदहाल है और इस हालात को सुधरने के लिए पैसे की जरुरत है यह तो सब कहते है लेकिन पैसे आयेगा कहा से या देगा कौन इस बात पर सब खामोश है
अगर हम देखे तो किराये में यह बढोतरी नो वर्ष बाद की गयी है इन वर्षों में खर्चे की दरे कही बड गयी है
हमें नयी रेले चाहिए नए रेल कारिडोर चाहिए चमचमाते स्टेशन चाहिए बेहतर यात्री सुविधए चाहिए लेकिन वही वर्षों पुरानी कीमत में
तो यह कैसे संभव होगा ?
अगर आज हम अपने उन माननीय सांसदों से कहे की आप आज से आठ वर्ष पुराने वेतन पर काम कर तो फिर देखे
हमारे यह माननीय सांसद अपना खर्चा पानी ज्यादा करने के लिए तो कभी भी एक जुट हो जाते है लेकिन रेलवे की माली हालत के बारे में ऐसा क्यों नही सोचते
सिर्फ आपने फायदे के लिए दिखावाबजी करते है जबकि इन लोगो को आम जनता से कही कोई सरोकार नही है
जिस आम आदमी के फायदे के लिए कहा जा रहा है की रेल किराये में वृद्धि वापिस होनी चाहिए वह आम आदमी तो इस मामूली वृद्धि से कही नाखुश नजर नहीं आ रहा
एक समझदार इंसान यही कह रहा है की यह वृद्धि तो काफी पहले से जरूरी थी लेकिन राजनितिक फायदे के लिए भूतपूर्व रेल मंत्री ऐसा करने से चूकते रहे
आम आदमी का तो सिर्फ इतना खाना की पैसा भले थोडा ज्यादा ले लो लेकिन हमें कम से कम कुछ तो वह सब सुविधाए दो जिनके सब्जबाग हर रेल मंत्री दिखता आ रहा है
बेहतर यात्री सुविधाए
बेहतर यात्री सुरक्षा उपाय
गाडियों की गति में बढोतरी
विश्व क्लास के रेलवे स्टेशन
सुगमता से टिकटों की उपलब्धता
यह सब अभी दूर की कौड़ी है जिनपे चर्चा तो हर रेल बजट में होती है लेकिन घोषणा सिर्फ घोषणा ही बनकर रह जाती है
राजनितिक दबाव की वजह से रेल मंत्री ने इस्तीफ़ा तो दे दिया है और जल्दी ही हमें एक नया रेल मंत्री भी मिलेगा
रेल मंत्री का यह ब्यान मैं वो ही करता रहूंगा जो भारतीय रेलवे के लिए जरूरी है। मैं कुछ भी होने से पहले एक भारतीय हूं और मेरे लिए किसी भी चीज से पहले देश आता है। पार्टी से पहले भी देश आता है, परिवार से पहले भी देश आता है। भगत सिंह ने तो देश के लिए जान दे दी थी। मेरे सामने तो सिर्फ मंत्रीपद है ने उनकी देश के सामने एक अच्छे राजनेता की छवि प्रस्तुत की है
उनके इसके कृत्य के लिए भले ही उन्हें मंत्री पद गवाना पड़ा हो लेकिन उनकी छवि एक एक भारतीय के दिल में एक आम लालची राजनेता की न होकर अच्छे राजनेता की हो गयी है
श्री दिनेश त्रिवेदी का ऐसे बयान और बजट के लिए हार्दिक आभार

Thursday, March 10, 2011

आई आर सी टी सी का मौन व्रत

आई आर सी टी सी एजेंट लोग इन १ मार्च से बंद है जिस वजह से भारत भर के ई टिकेट एजेंट न तो नया बुकिंग कर पा रहे है और न ही पुराने बनाये गए बुकिंग रद्द कर पा रहे है
आज ११ वा दिन है और अभी तक आई आर सी टी सी की और से इस मसले पर कोई अधिकृत सूचना जारी नहीं की गयी और इसी तरह का लापरवाही रवैया रहा तो एजेंट लोग अब किसी प्रकार की घोषणा की उम्मीद भी नहीं कर रहे
लोग इन बंद है नया टिकेट जारी नहीं होगा यह सरासर गलत ऊपर से अन्याय यह की पुराने बनाये गए टिकेट भी रद्द नहीं हो पा रहे
एजेंट को टिकेट कैंसल करने के लिए आई आर सी टी सी को या फिर मास्टर एजेंट को मेल लिखना पड़ता है और इस प्रकार टिकेट कैंसल होने मैं काफी समय बरबाद होता है इस प्रकिर्या से टिकेट कैंसल करने मैं ५ से ६ घंटे का समय तक लग रहा है अगर इस दोरान चार्ट बन जाये तो फिर इस हानि का जिमेदार कौन होगा ?
आई आर सी टी सी ने हर मुद्दे पर मौन व्रत धारण कर रखा है जो की आने वाले दिनों मैं नुक्सान दायक होगा

Thursday, March 3, 2011

आज तीसरा दिन है की भारत भर के आई आर सी टी सी के अधिकृत ई टिकेट एजेंट्स के लोग इन बंद है
इस तीन दिनों मैं ना तो नयी बुकिंग हो पाई है और टिकेट कैंसल करने मैं भी पसीने छुट रहे है
लापरवाही का आलम यह है की इन तीन दिनों मैं न तो रेलवे और न ही आई आर सी टी सी द्वारा कोई अधिकृत सूचना जारी की गयी है की ऐसा कब तक चलेगा
इन तीन दिनों मैं जो एजेंट्स को नुक्सान हुआ है उसकी भरपाई कौन करेगा ?
कोई कुछ भी कहने की स्थिति मैं नहीं है की ऐसा कब तक चलेगा
ज्यादा कुछ नहीं कम से कम इस दोरान आई आर सी टी सी से एक अधिकारिक बयान की तो अपेक्षा तो की जा सकती है

Tuesday, March 1, 2011

अधूरा स्टिंग ऑपरेशन

एक बार फिर से आई आर टी सी ने ई टिकेट बुकिंग एजेंट्स पर किया प्रहार
आज सुबह से ही भारत भर के सब एजेंट्स की लोग इन बंद कर दी गयी है बिना किसी सुचना के
कोई जवाब देने वाला नहीं
स्टार न्यूज ने स्टिंग ऑपरेशन तो किया लेकिन अधूरा जो छोड़ गया कई सवाल
- अगर स्टार न्यूज ने तत्काल टिकेट बुक किये थे सॉफ्टवेर के जरिये तो उनका पी एन आर नंबर क्यों नहीं दिखाया गया ?
- सिर्फ ई टिकेट एजेंट्स का स्टिंग ऑपरेशन क्यों ?
- रेलवे स्टेशन पर जो कालाबाजारी होती है उसका क्या ?
- उसके बारे मैं जब पुछा जाता है तो सब चुप क्यों हो जाते है ?
- क्या इस लिए की स्टेशन से होने वाले कमाई का हिस्सा मीडिया सहित सब लोगो मैं बांटा जाता है !
- रेलवे स्टेशन पर होने वाले धान्द्ली के लिए भी ई टिकेट एजेंट्स को निशाना बनाना कहा तक उचित है ?
- अगर ई टिकेट एजेंट्स को बुकिंग से रोकना है तो पहले इतना ज्यादा पैसा ले कर अधिकृत क्यों किया ?
- तत्काल और ओपनिंग डेट की बुकिंग के पहले एक घंटे RTSA को बंद क्यों नहीं किया जा रहा ?

यह सब हो रहा है आम जनता को फायदा पहुचने के नाम पर लेकिन इस कदम से आम जनता की परेशानी बढेगी या घटेगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा

Saturday, July 10, 2010

रेल मंत्रालय द्वारा आई आर सी टी सी अधिकृत एजेंट को तत्काल सेवा का टिकेट बुकिंग करने पर प्रतिबन्ध लगाने सम्बन्धी फैसला से क्या आम जनता को राहत मिलेगी या परेशानी बढेगी ?

आज से रेल मंत्रालय के आदेश अनुसार आई आर सी टी सी अधिकृत एजेंट सुबह 8 से 9 बजे तक तत्काल सेवा और 90 दिन पहले होने वाली एडवांस बुकिंग नहीं कर पाएंगे यह फैसला पिछले कुछ महीनो से तत्काल मैं होने वाली गड़बड़ियो को रोकने के मद्दे नजर लिया गया है ताकि आम आदमी को तत्काल सेवा का टिकेट मिलने मैं परेशानी न हो लेकिन क्या वाकई इस फैसले से आम आदमी को कोई रहत मिलेगी या उल्टा इस से परेशानी बढेगी

जैसा की सब जानते है की रेलवे की टिकेट बुक करने के दो रास्ते है एक स्टेशन पर टिकेट खिड़की पर लाइन मैं खड़े होकर और दूसरा आई आर सी टी सी की साईट से घर बैठे इन्टरनेट द्वारा अब जैसा की हर साल होता है गर्मियों की छुट्टियों मैं जब सब गाडियों मैं लम्बा वेटिंग हो जाता है तो कन्फर्म टिकेट लेने के लिए सिर्फ तत्काल कोटा ही बचता है जो की गाड़ी छुटने से दो दिन पहले खुलता है सुबह 8 बजे से जिसे लेने के लिए बहुत मारा मरी है अगर 100 सीट का कोटा है तो 1000 दावेदार है सीजन के समय इन सीटो को भरने मैं कई बार एक मिनट से भी कम समय लगता है क्योकि इसकी बुकिंग देश भर मैं एक साथ खुलती है (स्टेशन पर भी और आई आर सी टी सी की साईट पर भी) तो लोगो को लगता है की इस मैं कोई धांधली हो रही है जबकि अगर आप देश भर मैं रिजेर्वेशन केन्द्रों की संख्या और इन्टरनेट पर बुकिंग करने वाले(इसमें एजेंट और आम जनता दोनों शामिल है) की संख्या देखेंगे तो आप को इस का उत्तर स्वयम मिल जायेगा जिस तरह शेयर बाजार मैं एक ही मिनट मैं भाव या तो एक दम ऊपर चला जाता हा यह फिर एक दम गिर जाता है तो यह तत्काल का सिस्टम भी उसी तरह चंद लम्हों का खेल है

जैसा की सभी को पता है स्टेशन की टिकेट खिडकियों पर अनधिकृत दलालों का पूरी तरह से कब्ज़ा है और इनकी बुकिंग क्लर्क से साठ गाठ भी होती जिस वजह से इन लोगो से क्लर्क एक से ज्यादा फॉर्म भी ले लेते है जबकि आम आदमी को दूसरा फॉर्म होने की स्थिति मैं दोबारा लाइन मैं आने के लिए कहा जाता है और तो और कई बड़े शहरे मैं हाल यहाँ तक है की सुबह बुकिंग मैं पहला नंबर हासिल करने के लिए एक रात पहले ही लाइन लग जाती है यह लोग रात रात भर लाइन मैं लगे रहते है ताकि सुबह ज्यादा से जायदा तत्काल के टिकेट बनवा कर उन्हें मुह मांगे दामो पर बेचा जा सके क्योकि स्टेशन से बुक किये गए टिकेट पर रेलवे किसी भी तरह का पहचान पत्र नहीं मांगता इसलिए किसी भी फर्जी नाम से टिकेट बुक कर किसी भी व्यक्ति को आसानी से बेचा जा सकता है जो की देश की सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है

आम आदमी के लिए तो टिकेट खिड़की से टिकेट बनवा पाना बुरे सपने के समान है क्योकि इन लोगो की वजह से आम आदमी टिकेट खिड़की तक पहुच ही नहीं पा रहा

अब हम सिक्के के दुसरे पहलु को देखते है आई आर सी टी सी की साईट से टिकेट अजेंट्स और आम जनता दोनों द्वारा बुक किये जा सकते है एजेंट और आम जनता दोनों के लिए यह साईट समान रूप से कार्य करती है अगर एजेंट के लिए बुकिंग 8 बजे खुलती है तो आम जनता के लिए भी उसी समय खुलती है लेकिन सीजन के समय बहुत सारे लोगो द्वारा एक ही समय पर कोशिश करने की वजय से यह साईट तत्काल खुलते ही तुरन बंद हो जाती है और इस दिक्कत का सामना एजेंट और आम जनता दोनों को करना पड़ता है जबकि लोगो मैं वहम है की अजेंट्स के लिए कोई अलग से सर्वर है जिस वजह से उनके टिकेट बन जाते है लेकिन वाकई मैं ऐसा नहीं है हर कोई एजेंट तत्काल टिकेट बना पाने मैं सफल नहीं होता तत्काल का टिकेट बना पाना एक बिगडेल घोड़े की सवारी करने के समान है जिसको साधना हर किसी के बस की बात नहीं है और यह नियमित अभ्यास से ही संभव हो पता है यानि की तत्काल टिकेट बना पाने के लिए अजेंट्स को भी लम्बे समय तक धेर्य और अभ्यास करना पड़ता है

अब रेल मंत्रालय के इस कदम से टिकेटखिड़की पर साठ गाठ कर टिकेट हासिल करने वालो लोगो और बाबुओ की चांदी हो जाएगी और आम आदमीं फिर से तत्काल टिकेट के लिए परेशान होगा इसके अतिरिक्त कई लोग ऐसे भी है जो अपनी यात्रा की जरूरतों के लिए पूरी तरह से ई टिकेट एजेंट पर निर्भर है इनमे कार्पोरेट सेक्टर को वह लोग शामिल है जिन्हें अपने काम की वजह से महीने मैं कई दिन इधर से उधर दुसरे शहर मैं घूमना पड़ता है नए शहर मैं जाकर भी ऐसे लोग अपने से सम्बंधित अजेंट् से ही टिकेट बुक करवाते है वजह एक तो अनजान शहर और दूसरा सुबह सुबह यह लोग उठ कर एक टिकेट के लिए आई आर सी टी सी की साईट से नहीं जून्झ सकते जबकि इस श्रेणी के लोगो के पास लैपटॉप और डाटा कार्ड (इन्टरनेट सुविधा) आसानी से उपलब्ध है सब से ज्यादा परेशानी तो इस निर्णय से इस श्रेणी को होने वाली है अगर इस मुद्दे के दोनों पहलु देखे जाये तो यह साफ़ है की यह निर्णय लोगो की तकलीफ कम करने की बजाये बढायेगा ही और इसका फायदा स्टेशन खिड़की पर साठ गाठ करने वाले लोगो को फायदा पहुचाने के लिए किया गया है

भ्रष्टाचार मैं आकंठ डूबी भारतीय रेलवे ने अपनी गलती पे पर्दा डालने के लिए तत्काल सेवा मैं धांधली के लिए दोषी ठहराया आई आर सी टी सी अधिकृत अजेंट्स को


भारतीय रेलवे ने डाला अपनी गलती पर पर्दा और दोषी ठराया आई आर सी टी सी अधिकृत अजेंट्स को

यह तो सब को मालूम है की सीजन के समय आई आर सी टी सी की साईट से तत्काल सेवा का टिकेट बुक करना लोहे के चने चबाने के समान है, क्या आम जनता क्या अधिकृत एजेंट सब परेशान क्योकि आई आर सी टी सी साईट तत्काल खुलने के समय ही बंद हो जाती जिसकी वजह भी मामूली सी है की सर्वर की क्षमता से कही जायदा लोगो द्वारा एक साथ बुकिंग के लिए कोशिश करना जिस वजह से सुबह साईट ठप्प हो जाती कोई विरला ही किस्मत वाला आई आर सी टी सी की साईट से टिकेट बुक कर पता था

जब की स्टेशनों की टिकेट खिडकियों पर अनधिकृत दलालों का अघोषित कब्ज़ा रहता था जो की बुकिंग क्लर्क के साथ साठ गाठ कर के तत्काल सेवा के टिकेट हासिल कर लेते थे अवेध रूप से

जब की परेशान तो होता था आम आदमी अब रेलवे ने अपनी खिडकियों की दशा मैं सुधार न करके सारा दोष आरोपित कर दिया आई आर सी टी सी अधिकृत अजेंट्स की और अब इन्हें तत्काल सेवा का टिकेट बुक न करने देने की कार्यवाही की जा रही है जोकि सरासर गलत है

यह सिर्फ आम जनता का ध्यान असली मुद्दे से हटाने जैसा है और इस कदम से आम जनता की परेशानी और भी बढेगी क्योकि टिकेट खिड़की पर अवैध कब्ज़ा जमाये लोग अब इस कदम का नाजायज फायदा लेंगे और जनता की परेशानी और भी बढेगी

होना तो यह चाहिए था की रेलवे इस दिशा मैं अपनी टिकेट खिडकियों पर एक अभियान चला कर आम आदमी को टिकेट दिलवाने की कोशिश करती क्योकि आम आदमी के लिए टिकेट खिड़की से तत्काल टिकेट बनवा पाना एक बुरा सपने जैसा ही है जबकि इन्होने हल्ला बोल दिया आई आर सी टी सी अधिकृत अजेंट्स पर

जबकि आई आर सी टी सी की साईट अजेंट्स और आम जनता दोनों के लिए के लिए तत्काल बुकिंग के समय और पूरा समय एक सामान कार्य करती है अगर आम जनता को साईट से बुकिंग करने मैं कोई परेशानी होती है तो वोही परेशानी अजेंट्स को भी होती है जबकि आम जनता मैं यह वहम है की आई आर सी टी सी अजेंट्स के पास बुकिंग करने के लिए कोई अलग साईट या सर्वर होता है जिस से बुकिंग हो जाती है जबकि यह तथ्य पूर्ण से गलत जानकारी पर आधारित है

तत्काल की बुकिंग करने के लिए कोई आसान रास्ता नहीं होता अगर कोई एजेंट कुछ टिकेट बना भी पता है तो इस के पीछे उसकी लम्बे समय की कोशिश है और यह एक तरह से रोजाना प्रक्टिस करने से ही संभव हो पता है यानि की तत्काल को साधने मैं किसी भी एजेंट को लम्बा समय लगता है हर कोई एजेंट भी तत्काल बुकिंग नहीं कर पाने मैं सफल नहीं होता

मेरे विचार के अनुसार रेलवे अपनी गलती छुपा कर अधिकृत अजेंट्स पर दोषारोपण कर रहा है लेकिन इस कदम से आम आदमी को फायदा मिलने के बजाय उल्टा नुक्सान ही होगा

बाकि तो आने वाला समय ही बताएगा

आगे आगे देखिये होता है क्या


Sunday, July 4, 2010


DETECTED FAULT IN TIME TABLE OF 289 INDORE BHOPAL PASSENGER

I had a booking in train No 289 Bhopal Passenger for the date 05/07 from UJN TO BPL. The status was waitlist so I checked the status from DWX and it was available Please check the time table form official web site. It leaves INDB at 23:30 on day 1 & reaches DWX at 00:06 on day 2 & so on UJN @ 00:55 on day 2. So I booked the ticket from DWX TO BPL with boarding point UJN.
As it covers the journey between DWX, UJN & BPL on the same day. So I booked the ticket from DWX to BPL with boarding point UJN on 05/07.
But when I checked the pnr I was astonished to see journey date 06/07. I thought I made a mistake while entering date so cancelled the ticket immediately. The PNR no of it was 824-4593449.
Booked ticket again and the same thing happened again with the PNR no 840-0443950. I was not able to understand why It was happening. On the pnr status page I clicked on the tab "Get Schedule" & astonished to see a new time table of the train.
Please check the pnr first & open the schedule form same page you will get an error.
It shows that train leaves INDB @ 23:45 on day 1 & reaches DWX @ 02:21 on day 2 & reaches UJN @ 01:10 on day 3.
so it is showing that the train takes around 23 hours to cover the journey of just 41 KM.
I called IRCTC & reported the matter.
After a long discussion they agreed to my point & told me that they reported the error to PRS but still I am confused that what will happen. My journey date is 05/07 or 06/07.
The ticket print out says it is 06/07 but it is system error which is clear to every one.
IRCTC suggested me not to book tickets until the error not fixed.
In evening I again checked the matter
Railway had fixed the problem
and again my journey date changed to 05/07(My desired date).
So my problem get solved.